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संगमन

विगत पन्द्रह वर्षों से संगमन की यात्रा अपने गंभीर सरोकारों के साथ जारी है। हिन्दी कहानी के विमर्श का एक बहुत महत्वपूर्ण मंच है - संगमन। आयोजन की गुणवत्ता, उत्तरोत्तर निखरता स्वरूप, कहानी पर हुई सोद्देश्य बैठकें - सार्थक विमर्श और हर संगमन के बाद अगले संगमन को लेकर लेखकों की उत्सुकता ही इस बात का प्रमाण है कि संगमन साहित्य और उसके सरोकारों के लिये प्रतिबध्द है। इस प्रतिबध्दता में औपचारिकता कम है, उदारता अधिक है। पुराने प्रतिष्ठित लेखकों को युवा लेखकों से रू - - रू करवाना, जहां युवाओं के लिये एक तरह से कहानी की कार्यशाला जैसा है, वहीं पुराने लेखकों को जाने अनजाने इस जिम्मेदारी का अहसास कराता है कि यही युवा साहित्य की विरासत और उसके मूल्यों का संवाहक है। यही संगमन की उदारवादी सोच और दूरगामी उद्देश्य है। मुख्यधारा से दूर छोटे शहरों के लेखकों के लिए संगमन जैसे कार्यक्रम उन्हें साहित्य की समकालीन दुनिया से जोड़ने का काम करते हैं।
साहित्य के प्रति सरोकारों का जो स्वरूप संगमन की गोष्ठियों में दिखता है वह अन्यत्र दुर्लभ है।

संगमन की अब तक की गतिविधियों और उपलब्धियों के समग्र विवरण के साथ
सं
गमन
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संगमन 17

नवम्बर प्रथम सप्ताह में संगमन – 17 माँडू में आयोजित हुआ है. विषय था – समय से सम्वाद.  संक्षिप्त रपट व विवरण के लिए यहाँ क्लिक करें - संगमन - 17

 

 

 

 

 

संगमन 17

 

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